
पंजाब में भीषण बाढ़ से उत्पन्न संकट के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक हाई लेवल बाढ़ प्रबंधन समीक्षा बैठक बुलाकर हालात पर कड़ा संज्ञान लिया है। इस अहम बैठक में राज्य के कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, आप (आम आदमी पार्टी) के सभी विधायक और संबंधित विभागों के प्रमुख अफसर शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वह स्वयं, उनके सभी मंत्री और आम आदमी पार्टी के विधायक एक महीने का वेतन राहत कोष में देंगे। यह राशि राज्यभर में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और आवश्यक सहायता के लिए उपयोग की जाएगी।
मुख्यमंत्री की भावुक अपील: “यह समय एक-दूसरे का हाथ थामने का है”
बैठक से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “पंजाब प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। हजारों लोग बेघर हुए हैं, फसलें तबाह हो चुकी हैं, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त है। इस कठिन समय में हम सबको एक साथ खड़ा होना होगा। सरकार सिर्फ प्रशासनिक उपाय नहीं, बल्कि इंसानियत के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पूरी ताकत के साथ राहत और बचाव कार्यों में लगी है, लेकिन इस मानवीय संकट से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग भी जरूरी है।
एक महीने के वेतन का योगदान: एकजुटता की मिसाल
भगवंत मान ने कहा कि उनका यह फैसला एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी जनसेवा में विश्वास करती है। संकट की इस घड़ी में हम अपने वेतन से योगदान देकर उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। मैं सभी राजनीतिक दलों, संस्थाओं और आम लोगों से भी अपील करता हूं कि वे अपनी क्षमता अनुसार बाढ़ राहत में योगदान दें।” यह पहल न केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है, बल्कि जनता के साथ सीधा जुड़ाव भी स्थापित करती है।
समीक्षा बैठक के मुख्य एजेंडे
- बाढ़ प्रभावित जिलों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट
- राहत और बचाव कार्यों की प्रगति
- प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था
- आवश्यक खाद्य सामग्री, दवाओं और पेयजल की उपलब्धता
- टूटे हुए पुलों और सड़कों की मरम्मत की योजना
- फसलों के नुकसान का आकलन और मुआवजा नीति
- पुनर्वास कार्यों की दीर्घकालिक योजना
- मौसम विभाग से मिले अगले कुछ दिनों के पूर्वानुमान पर रणनीति
राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर जिले में एकीकृत, समयबद्ध और प्रभावी तरीके से कार्य किया जाए।
संकट की घड़ी में राजनीतिक संकल्प
सीएम भगवंत मान ने यह स्पष्ट किया कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर जनता के साथ खड़े होने का है। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि वे राहत कार्यों में बाधा डालने के बजाय सहयोग करें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह कदम एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें वह खुद को जननेता के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। हालांकि, इस आपदा में जो मानवीय पहलू सामने आ रहा है, वह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
सेना, NDRF और SDRF के साथ समन्वय
सीएम कार्यालय से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार ने भारतीय सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के साथ मिलकर कार्य करने के लिए एक आपात समन्वय केंद्र स्थापित किया है। यह केंद्र प्रभावित जिलों के कलेक्टरों और राहत कर्मियों के बीच सीधा संपर्क बनाकर राहत कार्यों को गति देगा। अब तक 8000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, और 500 से अधिक अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
किसानों के लिए विशेष सहायता नीति की घोषणा जल्द
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि फसल नुकसान झेल रहे किसानों के लिए विशेष राहत नीति पर काम चल रहा है। कृषि विभाग को तत्काल सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे जल्द ही प्रभावित किसानों को मुआवजा प्रदान किया जा सके।
उन्होंने कहा, “हमारे अन्नदाता संकट में हैं। राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। न केवल मुआवजा दिया जाएगा, बल्कि ऋण राहत और बीज वितरण जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी।”
राहत शिविरों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाएं
बैठक में यह भी समीक्षा की गई कि राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाएं—जैसे साफ पानी, भोजन, बिजली और चिकित्सा सहायता—प्रभावी रूप से उपलब्ध हैं या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए विशेष चिकित्सा दल तैनात करें और प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं।
सोशल मीडिया और तकनीकी निगरानी का उपयोग
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि ड्रोन, सैटेलाइट मैपिंग और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के माध्यम से हालात पर 24×7 नजर रखी जाएगी। प्रभावित क्षेत्रों से नागरिक अपने मोबाइल ऐप्स के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिन्हें तुरंत संबंधित प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।
मुख्यमंत्री का संदेश: “हर पंजाबी एक सैनिक है”
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संदेश में कहा, “जब पंजाब संकट में होता है, तब उसका हर नागरिक एक सैनिक की भूमिका निभाता है। आज हम सबको मिलकर इस आपदा का सामना करना है। मैं जानता हूं कि यह चुनौती कठिन है, परंतु हमारी एकजुटता और सेवा भावना इसे मात दे सकती है।”