
बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर जनवरी 2023 में हुए हमले के मामले में गिरफ्तार हुए संदिग्ध आकाश कनौजिया ने बॉम्बे हाई कोर्ट में मानहानि का मामला दायर किया है। आकाश ने गृह मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मानहानि का केस दायर कर एक करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। इस केस के बाद कानूनी जटिलताओं ने एक नया मोड़ ले लिया है, और मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार हुआ संदिग्ध
आकाश कनौजिया को मुंबई पुलिस ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। उसे इस हमले से जुड़े मामले में संदिग्ध के रूप में पकड़ा गया था। 15-16 जनवरी की रात सैफ अली खान पर चाकू से हमले के बाद उसे पुलिस ने पकड़ लिया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया था। अब, आकाश ने अदालत में यह दावा किया है कि पुलिस की कार्रवाई ने उसके जीवन को पूरी तरह से प्रभावित किया है, जिससे उसका मानसिक संतुलन खराब हो गया है।
आकाश ने अपनी याचिका में दावा किया कि पुलिस द्वारा की गई गलत कार्रवाई की वजह से उसकी शादी टूट गई, रिश्तेदारों ने उससे संपर्क करना बंद कर दिया, और उसकी नौकरी भी चली गई। इसके अलावा, उसने मानसिक प्रताड़ना का आरोप भी लगाया और कहा कि उसे बिना किसी ठोस कारण के गिरफ्तार किया गया, जिसके कारण उसका जीवन बर्बाद हो गया।
आकाश कनौजिया का मानहानि का केस
आकाश कनौजिया ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा, “मेरे खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के मामला दर्ज किया गया, जिससे मेरी प्रतिष्ठा और जीवन को गहरा आघात पहुंचा। यह कार्रवाई मेरी छवि को खराब करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके कारण मैंने मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक कष्ट झेला है। मैं न्याय की उम्मीद करता हूं और इसके लिए गृह मंत्रालय के खिलाफ मानहानि का केस कर रहा हूं।”
आकाश ने मानहानि के इस केस में एक करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। उसने कहा कि वह इस मुकदमे को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहा है, ताकि उसे और उसके जैसे अन्य निर्दोष व्यक्तियों को न्याय मिल सके।
आकाश कनौजिया की पहले की प्रतिक्रिया
इससे पहले, आकाश कनौजिया ने मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उसने कहा था कि भले ही उसे पुलिस ने बाद में छोड़ दिया, लेकिन इस केस का उसके जीवन पर गहरा असर पड़ा है। उसने दावा किया कि उसकी नौकरी चली गई और उसकी शादी भी टूट गई। इसके अलावा, रिश्तेदारों ने भी उसे सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया। वह इस स्थिति में मानसिक प्रताड़ना का शिकार हुआ था, जिसे वह अब अदालत के माध्यम से सही करने की कोशिश कर रहा है।
आकाश ने यह भी कहा कि वह इस घटना से पहले एक सामान्य नागरिक था, लेकिन इस मामले के बाद उसकी पहचान बदल गई। उसकी छवि पर एक सवालिया निशान लग गया, और उसे समाज में अपमान का सामना करना पड़ा।
सैफ अली खान पर 15-16 जनवरी की रात हुआ हमला
यह घटना 15-16 जनवरी की रात की है, जब बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर चाकू से हमला किया गया था। सैफ अली खान इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें तुरंत लीलावर्ती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हमले के बाद, सैफ के परिवार ने उनकी देखभाल की और पांच दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्हें छुट्टी मिल गई।
यह हमला सैफ अली खान के मुंबई में अपने परिवार के साथ रात का समय बिता रहे थे, उसी दौरान हुआ था। पुलिस ने घटना के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए इस मामले में संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।
मोहम्मद शरीफुल इस्लाम का भी गिरफ्तारी में शामिल होना
सैफ अली खान पर हमले के मामले में पुलिस ने मोहम्मद शरीफुल इस्लाम नामक बांग्लादेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया था। शरीफुल को गिरफ्तार किए जाने के बाद, उसे अदालत में पेश किया गया, और उसके खिलाफ मामले की जांच की जा रही है। मंगलवार, 1 अप्रैल को सेशंस कोर्ट ने मुंबई पुलिस से शरीफुल इस्लाम की जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। शरीफुल इस्लाम ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया है कि उसने कोई अपराध नहीं किया और उसके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वे झूठे हैं।
शरीफुल ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि इस मामले की जांच व्यावहारिक रूप से पूरी हो चुकी है, और अब उसे जमानत दी जानी चाहिए। इस याचिका पर अदालत में सुनवाई की तारीख तय की गई है।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
आकाश कनौजिया ने अपनी याचिका में यह सवाल उठाया है कि अगर उसे गिरफ्तार किया गया था, तो उसे गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे क्यों छोड़ दिया? उसने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान उसे न्याय नहीं मिला, और वह अपने खिलाफ दर्ज मामले को पूरी तरह से गलत मानता है। इसके अलावा, उसने यह भी कहा कि उसे बिना किसी ठोस आधार के मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
वहीं, पुलिस ने इस मामले में अपना बचाव करते हुए कहा है कि गिरफ्तारी केवल संदिग्ध होने के आधार पर की गई थी और इसके बाद जांच के दौरान साक्ष्य के अभाव में उसे छोड़ दिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि अब तक की जांच में किसी संदिग्ध की संलिप्तता नहीं पाई गई है, जिससे मामला स्पष्ट नहीं हो पाया।