
उत्तराखंड के बदरीनाथ हाईवे पर बुधवार सुबह से मलबा आने के कारण यातायात पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। पागलनाला, भेलपानी, नंदप्रयाग, गौचर के समीप कमेड़ा और कई अन्य स्थानों पर भारी मलबा आने से हाईवे अवरुद्ध हो गया, जिसके चलते वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। तीर्थयात्री, जो बदरीनाथ धाम की यात्रा के लिए आ रहे थे, उन्हें रास्ते के खुलने का इंतजार है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने उत्तराखंड में कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने की घटनाओं को बढ़ा दिया है। इस कारण राज्य के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित हो गया है, जिससे यात्री और स्थानीय लोग परेशान हैं।
मलबे की सफाई जारी, लेकिन खतरा बना हुआ है
मलबे के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे यात्री भीषण गर्मी और बारिश के बीच समय बर्बाद करने को मजबूर हैं। हालांकि, प्रशासन ने मलबे की सफाई शुरू कर दी है, और वाहनों की आवाजाही को धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है, लेकिन हिल साइड पर अब भी मलबा जमा है।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बारिश के कारण स्थिति कभी भी बदल सकती है, और मलबा फिर से रास्ते में आ सकता है। इससे यात्रा में और भी देरी हो सकती है। प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से मलबा हटाने और रास्ते को सुरक्षित करने का कार्य तेज कर दिया है, ताकि जल्द से जल्द यातायात को सामान्य किया जा सके।
गुजरात के तीर्थयात्रियों का अनुभव
गुजरात से आए तीर्थयात्रियों ने बताया कि उन्हें श्रीनगर से पीपलकोटी तक पहुंचने में लगभग 16 घंटे का समय लग गया। वे रास्ते में फंसे रहे और कई जगहों पर ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। एक तीर्थयात्री ने कहा, “हमने सोचा था कि यह यात्रा थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन यहां की सड़कों की स्थिति और मलबे के कारण हमारी यात्रा उम्मीद से कहीं अधिक कठिन हो गई।” गुजरात के इन तीर्थयात्रियों का अनुभव इस बात का प्रमाण है कि बदरीनाथ हाईवे की स्थिति न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी समस्याएं उत्पन्न कर रही है।
गौचर और सिमली-ग्वालदम की सड़कों की स्थिति भी गंभीर
बदरीनाथ हाईवे के अलावा, गौचर के पास कमेड़ा और सिमली-ग्वालदम-अल्मोड़ा हाईवे पर भी मलबे और भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित हो गया है। यहां भी मलबा हटाने का कार्य तेजी से जारी है, लेकिन बारिश की तीव्रता के कारण स्थिति काबू से बाहर हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जहां भी मलबा आया है, वहां की सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ सुरक्षा उपायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर भारी बारिश जारी रही तो पहाड़ी इलाकों में और भी भूस्खलन हो सकता है, जिससे सड़कें और ज्यादा अवरुद्ध हो सकती हैं।
जिलाधिकारी का बयान
जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की है। उन्होंने कहा, “हमारे कर्मचारी और अधिकारी सभी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं। मलबा हटाने का कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही मार्ग को खोल दिया जाएगा। हालांकि, बारिश और भूस्खलन के कारण हम पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हो सकते, लेकिन हमारी पूरी कोशिश है कि यात्रा को जल्दी बहाल किया जाए।”
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आपातकालीन स्थिति में हर संभव सहायता प्रदान करें और जल्द से जल्द सड़कों को सुरक्षित बनाएं। साथ ही, यात्री भी प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि वे यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए मार्ग की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर ही यात्रा पर निकलें।