
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटे में राज्य के तीन ज़िलों—रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी—में बादल फटने की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन हादसों में अब तक एक महिला की मौत, कई लोग लापता, कई घायल और विस्तृत नुकसान की खबरें आ रही हैं। घटनास्थलों पर राहत और बचाव अभियान तेजी से चल रहा है, जबकि जिला प्रशासन ने चमोली जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है।
रुद्रप्रयाग में तबाही: टेंडवाल गांव में मलबे में दबने से महिला की मौत, कई लापता
रुद्रप्रयाग जिले के टेंडवाल गांव में बृहस्पतिवार देर रात बादल फटने की घटना में एक महिला की जान चली गई है। जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि अभी तक 18 से 20 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए NDRF और SDRF की टीमें रवाना हो चुकी हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात को अचानक तेज बारिश शुरू हुई और कुछ ही पलों में पूरे गांव में मलबा भर गया। कई घर मलबे में दब गए और लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके।
चमोली में फिर फटा बादल: मोपाटा गांव में पति-पत्नी लापता, दो घायल, 20 मवेशी दबे
चमोली जिले के देवाल ब्लॉक में स्थित मोपाटा गांव में भी बादल फटने से भारी तबाही हुई है।
जिलाधिकारी संदीप तिवारी के अनुसार, गांव निवासी तारा सिंह और उनकी पत्नी लापता हैं। विक्रम सिंह और उनकी पत्नी घायल हुए हैं। इनके घर और गोशाला मलबे में दब गए, जिसमें 15 से 20 मवेशी भी मारे गए। रात से लगातार हो रही बारिश के चलते राहत कार्यों में बाधा आ रही है, लेकिन प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच चुकी है।
चमोली के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित, रास्ते बंद
डीएम ने भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए चमोली जिले के सभी ब्लॉकों के स्कूलों में शुक्रवार को अवकाश घोषित कर दिया।
विशेष जानकारी, देवाल और थराली में कई सड़क मार्ग अवरुद्ध हैं। आदिबदरी, कर्णप्रयाग समेत कई क्षेत्रों में भी भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो चुकी है।
कर्णप्रयाग में कालेश्वर क्षेत्र में मलबा: घरों में घुसा कीचड़, सड़क बंद
कर्णप्रयाग के कालेश्वर क्षेत्र में तेज बारिश के कारण ऊपर से मलबा गिर गया, जो स्थानीय घरों में घुस गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में JCB मशीनों से मलबा हटाने का कार्य जारी है। अलकनंदा और पिंडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में खतरे की आशंका है। सुभाषनगर में पहाड़ी से बोल्डर गिरने के कारण सड़क पूरी तरह बंद हो गई है।
टिहरी के भिलंगना ब्लॉक के गेंवाली गांव में भी बादल फटा
टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक स्थित गेंवाली गांव में भी बीती रात बादल फटने की घटना हुई।
हालांकि गनीमत रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया, कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ है। पेयजल पाइपलाइन, विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। राजस्व विभाग की टीम गांव के लिए रवाना हो चुकी है। कई जगहों पर पैदल पुल और सड़कें टूट गई हैं, जिससे संपर्क साधन पूरी तरह कट गए हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में हालात भयावह, लोग डरे-सहमे
राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
स्थानीय लोग डरे हुए हैं और सुरक्षित स्थानों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं। रातभर पानी की तेज आवाज और भूस्खलन की घटनाएं लोगों की नींद उड़ा चुकी हैं। कई गांवों में बिजली और नेटवर्क सेवाएं ठप हैं, जिससे राहत कार्यों में भी कठिनाई हो रही है।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
राज्य सरकार ने हालात पर नज़र रखते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत शिविर स्थापित किए जाएं। घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जाए।लापता लोगों की तलाश के लिए खोज अभियान तेज किया जाए। सड़कों और पुलों की मरम्मत कार्य प्राथमिकता से किया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा, “सरकार पूरी तरह अलर्ट है। प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद दी जाएगी। आपदा से निपटने के लिए SDRF और NDRF को पूरी तैयारी के साथ भेजा गया है।”