उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी, जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का राज्य सरकार की ओर से लोकभवन में भव्य स्वागत किया गया। यह अवसर न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, क्योंकि शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की यात्रा पूरी कर सुरक्षित लौटे हैं और अंतरिक्ष में भारत की उपस्थिति को नई ऊँचाइयों पर ले गए हैं।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि शुभांशु शुक्ला के नाम पर एक नई छात्रवृत्ति योजना शुरू की जाएगी, जो उत्तर प्रदेश के उन छात्रों के लिए समर्पित होगी जो विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अध्ययन करना चाहते हैं।
चार दशकों बाद भारत का अंतरिक्ष में गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, “चार दशक बाद भारत को यह अवसर मिला है कि उसका कोई सदस्य अंतरिक्ष में गया है, और यह हमारे लिए गर्व की बात है कि वह व्यक्ति लखनऊ में जन्मा और यहीं पला-बढ़ा है। शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि सिर्फ उत्तर प्रदेश की नहीं, पूरे भारत की है।” उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को लेकर किसी भी विश्वविद्यालय या संस्थान में कोई पाठ्यक्रम, डिग्री या डिप्लोमा नहीं था। लेकिन अब यह सोच बदल रही है, और सरकार इस दिशा में कई कदम उठा रही है।
यूपी सरकार की नई पहल: ‘शुभांशु शुक्ला स्कॉलरशिप योजना’
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में घोषणा की कि “शुभांशु शुक्ला स्कॉलरशिप योजना” जल्द ही शुरू की जाएगी, जिसके तहत प्रदेश के मेधावी छात्र अंतरिक्ष विज्ञान, एयरोस्पेस, रोबोटिक्स और भौतिक विज्ञान जैसे विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान और विज्ञान-तकनीकी विकास में अग्रणी बनाना है।
यह छात्रवृत्ति योजना आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन होनहार छात्रों को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में सहायता देगी। योजना के तहत राज्य सरकार देश और विदेश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में चयनित छात्रों की फीस, प्रशिक्षण, रिसर्च खर्च और यात्रा आदि का वहन करेगी।
“लखनऊ में मुस्कान से भरा स्वागत”: शुभांशु शुक्ला
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने मंच से संबोधन के दौरान भावुक होते हुए कहा, “जब से लखनऊ आया हूं, 2000 से ज्यादा सेल्फी खिंचवा चुका हूं। ‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं’—ये वाक्य मैंने आज हकीकत में महसूस किया।”
उन्होंने बताया कि दिल्ली से लेकर लखनऊ तक उन्हें जो उत्साह, अपनापन और गौरव का अनुभव हुआ, वह अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि उनका यह मिशन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी छात्रों और युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो अंतरिक्ष में करियर बनाने का सपना देखते हैं।
इसरो अध्यक्ष की बधाई और राष्ट्रीय गौरव का संकेत
इस विशेष सम्मान समारोह में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा: “शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में जाकर न केवल वैज्ञानिक प्रयोगों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की साख को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यह गगनयान मिशन के चार नामित अंतरिक्ष यात्रियों में से एक थे, और उड़ान भरने का अवसर इन्हें मिला। मैं उन्हें इस महान उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देता हूं।” डॉ. नारायणन ने यह भी कहा कि भारत का भविष्य अंतरिक्ष विज्ञान में उज्जवल है, और शुभांशु जैसे वैज्ञानिक और अधिकारी देश के युवाओं को उस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे।
भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया युग
शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की एकीकृत तैयारी का हिस्सा बनते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की। वह इस मिशन के तहत 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहे, जहां उन्होंने माइक्रोग्रैविटी के वातावरण में अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया। उनकी यह यात्रा अंतरिक्ष मिशन की भारतीय तैयारियों का हिस्सा थी और भविष्य में पूर्ण भारतीय मानव मिशन का आधार बनेगी।