
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) [जेडीयू] ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का समर्थन किया था, और इसके बाद से पार्टी में भारी विवाद उत्पन्न हो गया है। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर पार्टी में असंतोष चरम पर है, जिसके परिणामस्वरूप जेडीयू के वरिष्ठ नेता और जमुई के जिलाध्यक्ष मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। यह वही मुद्दा है जिसने पहले पार्टी के अन्य नेता मोहम्मद कासिम अंसारी को भी पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया था।
वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन और इस्तीफा
गुरुवार, 3 अप्रैल 2025 को, जेडीयू नेता मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने बिहार के मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को एक पत्र लिखकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। मलिक ने अपने इस्तीफे का मुख्य कारण वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के समर्थन को बताया और कहा कि यह कदम उनके लिए गहरी निराशा और असहमति का कारण बना है। उन्होंने पार्टी के प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ अपनी अन्य जिम्मेदारियों से भी इस्तीफा दे दिया है।
मलिक ने अपने इस्तीफे के पत्र की एक प्रति जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और पार्टी के अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ अंसारी को भी भेजी। पत्र में मलिक ने स्पष्ट रूप से कहा कि वक्फ विधेयक के समर्थन के बाद उनका विश्वास टूट गया है, जो उन्होंने नीतीश कुमार और जेडीयू पर रखा था।
इस्तीफा पत्र में क्या लिखा था मलिक ने?
शाहनवाज मलिक के इस्तीफे का पत्र उनके गहरे असंतोष और गुस्से को दर्शाता है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “हम जैसे लाखों-करोड़ों भारतीय मुसलमानों का अटूट विश्वास था कि आप विशुद्ध रूप से सेक्युलर विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन अब यह यकीन टूट गया है।” मलिक का यह बयान न केवल पार्टी के भीतर की असहमति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वक्फ विधेयक को लेकर जेडीयू में गहरी सोच और विश्वास का संकट पैदा हो गया है।
मलिक ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, “जिस तरह से ललन सिंह ने तेवर के साथ अपनी बात रखी है, वह हम जैसे लोगों के लिए बहुत ही दुखद है। हम लोग लंबे समय से इस पार्टी और इसके नेतृत्व से उम्मीदें रखते थे, लेकिन आज हमारी उम्मीदें टूट गई हैं।” मलिक ने कहा कि यह विधेयक उनके लिए एक बहुत बड़ा झटका है, और उन्होंने खुलकर कहा कि यह कदम उनके लिए बहुत दुखद और निराशाजनक था।
जेडीयू और नीतीश कुमार पर शाहनवाज मलिक की आलोचना
शाहनवाज मलिक ने इस्तीफे में यह भी कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक पर जेडीयू का समर्थन बेहद निराशाजनक था। उनका मानना है कि यह कदम पार्टी की सेक्युलर छवि को नुकसान पहुंचाता है और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक गंभीर संकेत है। मलिक का कहना था कि “हम मुसलमानों का दिल टूट चुका है, और हम अब जेडीयू और नीतीश कुमार दोनों को अलविदा कह रहे हैं।”
मलिक के इस्तीफे ने यह स्पष्ट कर दिया कि वक्फ विधेयक का समर्थन करने के बाद जेडीयू में कई नेता और कार्यकर्ता अपने नेतृत्व से असहमत हो गए हैं। यह भी दर्शाता है कि पार्टी का अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति रुख अब पहले जैसा नहीं रहा, और इससे पार्टी में आंतरिक कलह का जन्म हुआ है।