
प्रसिद्ध सूफी गायक और भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के पूर्व सांसद हंसराज हंस की पत्नी रेशम कौर का बुधवार दोपहर को निधन हो गया। लंबी बीमारी के बाद रेशम कौर ने जालंधर के टैगोर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद से उनके परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। हंसराज हंस और उनके परिवार के सदस्य इस दुखद समय में गहरे शोक में हैं, और रिश्तेदार एवं करीबी लोग शोक व्यक्त करने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।
रेशम कौर की बीमारी और अंतिम समय
रेशम कौर के भाई परमजीत सिंह ने बताया कि बुधवार दोपहर करीब 2:00 बजे रेशम कौर का निधन हो गया। परमजीत सिंह ने बताया कि रेशम कौर पिछले पांच दिनों से जालंधर के टैगोर अस्पताल में भर्ती थीं। शुरुआत में उन्हें कोई गंभीर समस्या नहीं थी, लेकिन कुछ दिन पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल किया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें उचित इलाज दिया और उनकी देखभाल की, लेकिन आखिरकार उनका शरीर बीमारी से लड़ने में सक्षम नहीं हो सका।
परमजीत सिंह ने आगे कहा, “रेशम कौर के अंतिम समय में परिवार के सभी सदस्य उनके पास थे, और हमने उनके साथ इस कठिन समय को साझा किया। हम सभी को यह दुखद खबर सुनकर गहरा दुख हुआ है।”
अंतिम संस्कार की जानकारी
रेशम कौर का अंतिम संस्कार गुरुवार (2 अप्रैल) को उनके पति हंसराज हंस के पैतृक गांव सफीपुर में किया जाएगा। परमजीत सिंह ने बताया कि रेशम कौर का शरीर उनके परिवार के लोगों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया जाएगा, और इस दौरान पूरे परिवार और करीबी रिश्तेदार मौजूद रहेंगे।
हंसराज हंस और रेशम कौर की शादी
हंसराज हंस ने 18 अप्रैल 1984 को रेशम कौर से शादी की थी। यह शादी एक लंबे और सशक्त रिश्ते का प्रतीक बन गई, और दोनों के दो बेटे हैं, युवराज हंस और नवराज हंस। परिवार में इस दुखद घटना के बाद से शोक की लहर है, और सभी सदस्य इस समय कठिनाई महसूस कर रहे हैं। हंसराज हंस के करीबी मित्र और रिश्तेदार भी उनके साथ इस मुश्किल घड़ी में खड़े हैं, और परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।
हंसराज हंस का संगीत करियर
हंसराज हंस, जिनका नाम भारतीय संगीत प्रेमियों के बीच एक प्रसिद्ध सूफी गायक के रूप में जाना जाता है, ने अपने करियर में कई सुपरहिट एल्बम्स और गीतों की रचनाएं की हैं। उनके गाने आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। हंसराज हंस की सबसे प्रसिद्ध एल्बम्स में चोरनी, सब तो सोनी, तेरा इश्क, मोहब्बत, तेरा मेरा प्यार, और एक कुड़ी मेनु रांझे से फकीर कर गई शामिल हैं।
उनका संगीत सूफी संगीत और प्रेम गीतों का अनूठा मिश्रण है, जो उन्हें दर्शकों के बीच एक खास पहचान दिलाता है। हंसराज हंस ने बॉलीवुड में भी कई प्रमुख गाने गाए हैं। उनके गीत कच्चे धागे, बिच्छू, जोड़ी नंबर 1, नायक, ब्लैक एंड व्हाइट, पटियाला हाउस, मौसम, और सोनू के टीटू की स्वीटी जैसी फिल्मों में सुनने को मिले हैं। उनके गाने न केवल भारतीय सिनेमा में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध हुए हैं। हंसराज हंस ने अपने संगीत के जरिए सूफी धर्म, प्रेम और मानवता का संदेश दिया है।