बाढ़ से जूझ रहे पंजाब में एक ओर जहां किसान अपने नुकसान की भरपाई की उम्मीद में हैं, वहीं राज्य सरकार ने खेतों से आई रेत को निकालने के लिए नई नीति लाने की तैयारी कर ली है। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने इस संबंध में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है और एक-दो दिनों में रेत निकालने संबंधी पॉलिसी को लागू कर दिया जाएगा।
बाढ़ के कहर से खेतों में जमा हुई रेत, फसलें चौपट
सिसोदिया ने बताया कि पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने कई जिलों में तबाही मचाई है। खासकर ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी के साथ भारी मात्रा में रेत जमा हो गई है, जिससे खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। इससे न केवल खरीफ फसल को नुकसान पहुंचा है, बल्कि आगामी रबी सीजन की तैयारी भी खतरे में पड़ गई है।
किसानों के लिए यह स्थिति दोहरी मार जैसी है — एक तरफ उनकी मौजूदा फसलें नष्ट हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर रेत से भरे खेतों में नई फसल की बुवाई कर पाना भी संभव नहीं दिख रहा है।
सरकार लाएगी रेत निकालने की नीति
आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, “हमारी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। खेतों में जो रेत आई है, उसे हटाने के लिए हम जल्द ही एक नई पॉलिसी लेकर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री से बात हो चुकी है और एक-दो दिन में यह नीति घोषित कर दी जाएगी।”
इस नीति के तहत संभवतः स्थानीय प्रशासन, किसानों और रेत निकालने वाले ठेकेदारों के बीच एक समन्वय स्थापित किया जाएगा ताकि बिना किसी अतिरिक्त बोझ के किसान अपने खेतों को पुनः खेती के लायक बना सकें।
केंद्र सरकार पर निशाना, राहत पैकेज की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9 सितंबर को प्रस्तावित पंजाब दौरे को लेकर भी सिसोदिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दौरा ठीक है, लेकिन इससे पहले उन्हें तत्काल राहत पैकेज का एलान करना चाहिए था। “जब किसान और आम लोग त्रासदी झेल रहे हों, तब दौरे की तारीखों का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को तुरंत आर्थिक मदद का एलान करना चाहिए था,” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अपने स्तर पर हरसंभव मदद कर रही है, लेकिन इतनी बड़ी आपदा से निपटने के लिए केंद्र का सहयोग बेहद आवश्यक है।
केंद्रीय मंत्री के बयान पर नाराजगी
हाल ही में पंजाब दौरे पर आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ की वजह अवैध खनन को बताया था। इस पर सिसोदिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस समय राजनीति करने की बजाय पीड़ितों की मदद की जानी चाहिए। “जब पूरा पंजाब बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है, तब यह कहना कि यह सब अवैध खनन की वजह से हुआ है — केवल राजनीतिक बयानबाजी है। अगर खनन की कोई समस्या है, तो उसका समाधान मिलकर निकालना चाहिए, न कि राज्य को दोष देना।”
सिसोदिया ने दो टूक कहा कि राज्य को बदनाम करना केंद्र सरकार की नीति का हिस्सा बनता जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
बाढ़ से पंजाब में हालात चिंताजनक
पंजाब के कई जिलों — विशेषकर रूपनगर, होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और लुधियाना — में बाढ़ के कारण सड़कें टूट चुकी हैं, गांवों में पानी भरा हुआ है और कई स्थानों पर अभी भी राहत कार्य जारी हैं। हजारों हेक्टेयर में फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं और सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक बाढ़ से 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है, जिसमें कृषि, पशुपालन और ग्रामीण संरचनाएं मुख्य रूप से प्रभावित हुई हैं।