
पंजाब में मूसलाधार बारिश और बांधों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और राज्य के आठ जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं। हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी है, गांव डूब चुके हैं और सड़कों-पुलों के टूटने से कई क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। राज्य सरकार और प्रशासनिक मशीनरी के साथ सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) राहत एवं बचाव कार्य में युद्धस्तर पर जुटे हैं।
बाढ़ ने मचाई तबाही, हजारों लोग बेघर
बांधों से भारी जलरवाहित पानी और लगातार हो रही वर्षा के कारण सूबे के प्रमुख नदियों—रावी, सतलुज और ब्यास—में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, तरनतारन, फाजिल्का, फिरोजपुर और अमृतसर जिले जलप्रलय का सामना कर रहे हैं।
गांवों में पानी भर जाने के कारण हजारों परिवार अपने घरों से निकलने पर मजबूर हो गए हैं। लोग ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं, जबकि सैकड़ों गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
सेना और राहत दल कर रहे हैं लोगों का रेस्क्यू
सरकार की ओर से भारतीय सेना को बाढ़ राहत अभियान में सक्रिय रूप से लगाया गया है। वीरवार को सेना ने अमृतसर जिले के 40 से अधिक बाढ़ग्रस्त गांवों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। हेलीकॉप्टर की मदद से पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
पठानकोट के माधोपुर हेडवर्क्स पर रावी दरिया के उफान से चार गेट बह गए, जिससे वहां तैनात 50 कर्मचारी फंस गए थे। उन्हें सेना ने एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला। इसके अलावा गुरदासपुर के जवाहर नवोदय विद्यालय दबुड़ी में फंसे 381 छात्रों और 70 शिक्षकों को रातभर के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया।
पाकिस्तान की ओर भी कहर, श्री करतारपुर साहिब में घुसा पानी
बाढ़ का असर सीमापार पाकिस्तान में भी देखा जा रहा है। रावी दरिया में आई बाढ़ के कारण पाकिस्तान स्थित श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा और करतारपुर कॉरिडोर में भी कई फीट तक पानी भर गया है। श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बताया कि पाकिस्तान के गुरुद्वारा प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य दरबार साहिब सहित पूरा परिसर जलमग्न हो चुका है।
यह धार्मिक दृष्टि से भी एक बड़ा झटका है क्योंकि सिख श्रद्धालु करतारपुर कॉरिडोर के जरिए इस पवित्र स्थल के दर्शन करते हैं।
बांधों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
पौंग बांध और रणजीत सागर बांध का जलस्तर बीते 24 घंटे में खतरे के निशान को पार कर गया है। इनसे छोड़े जा रहे पानी के चलते बाढ़ की स्थिति और भयावह हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलाशयों का जलस्तर यदि इसी गति से बढ़ता रहा तो और अधिक पानी छोड़ना पड़ेगा, जिससे निचले इलाकों में तबाही और बढ़ सकती है। बांध प्रबंधन इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है।
मौसम विभाग ने फिर से जारी किया भारी बारिश का अलर्ट
पंजाब में शुक्रवार से आगामी तीन दिनों तक फिर से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई जिलों में अत्यधिक वर्षा हो सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।
वीरवार को मौसम मुख्यतः शुष्क रहा और तापमान में हल्की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हो सकती है। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
फसलों को भारी नुकसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट
हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है। खासकर धान और मक्के की फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। पानी में खड़ी फसलें सड़ रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं निकला, तो यह खरीफ सीजन पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर चोट दे सकता है। राज्य सरकार ने फसल नुकसान का सर्वे शुरू करने के आदेश दिए हैं और किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया प्रारंभ करने की बात कही है।
स्कूल, रेल सेवाएं और सड़क यातायात ठप
अनेक जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। रेलवे लाइनें जलमग्न हो जाने के कारण कई ट्रेनें रद्द या डायवर्ट कर दी गई हैं। पंजाब के कुछ क्षेत्रों में रेलवे स्टेशनों तक पहुंच भी असंभव हो गया है।
सड़क मार्गों की हालत और भी खराब है—कई पुल टूट चुके हैं, सड़कों की सतह बह गई है और वाहन यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि हालात पर नजर बनाए हुए
राज्य सरकार ने सभी जिलों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे हालात पर नजर रखी जा रही है। प्रभावित जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर राहत शिविर की व्यवस्था सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क किया गया है ताकि जलजनित बीमारियों की रोकथाम की जा सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं।
राज्य के मंत्री और स्थानीय विधायक भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे लोग
जिन गांवों से लोगों को निकाला गया है, उन्हें राहत शिविरों में शरण दी जा रही है। प्रशासन द्वारा भोजन, पेयजल, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि कुछ स्थानों से शिकायतें भी आई हैं कि राहत सामग्री समय पर नहीं पहुंच रही या शिविरों में व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। प्रशासन का कहना है कि पूरी स्थिति पर लगातार काम हो रहा है और जल्द ही सभी को राहत मिलेगी।