
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कटरा में श्री माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर अर्धकुंवारी के पास हाल ही में हुए दर्दनाक भूस्खलन की घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस हादसे में 34 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी और 12 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा बादल फटने के कारण अचानक हुए भूस्खलन की वजह से हुआ।
उपराज्यपाल द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है। समिति न केवल हादसे के कारणों की तह तक जाएगी, बल्कि यह भी जांचेगी कि क्या इस त्रासदी को समय रहते टाला जा सकता था। साथ ही यह कमेटी भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और सुधारात्मक उपायों की भी सिफारिश करेगी।
यह हादसा 25 अगस्त की रात को हुआ, जब वैष्णो देवी मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के अर्धकुंवारी सेक्टर में तेज बारिश के साथ बादल फटा। इसके चलते अचानक बड़े पैमाने पर मलबा और चट्टानें नीचे आ गिरीं। हादसे में 34 श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा बलों और एनडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। हेलीकॉप्टरों और डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली गई। कई तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और घायलों को इलाज के लिए जम्मू मेडिकल कॉलेज और नारायणा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उपराज्यपाल की संवेदना और कार्रवाई
हादसे के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने कहा, “यह एक दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी है। हम मृतकों के परिजनों के साथ खड़े हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेंगे।”
इसके साथ ही उन्होंने तत्काल उच्च स्तरीय जांच का आदेश देते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को निर्देश दिए कि रिपोर्ट आने के बाद सभी आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएं।
तीर्थ यात्रा की अस्थायी रूप से रोक
भूस्खलन के बाद अर्धकुंवारी से आगे की यात्रा कुछ समय के लिए रोक दी गई थी। हालांकि, अगले दिन तक मार्ग को आंशिक रूप से खोल दिया गया और तीर्थयात्रियों को पूरी सुरक्षा के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रा के पुनः संचालन के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई। साथ ही, पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात गश्त दलों को और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।