
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विशेष रूप से एक धर्म को निशाना बनाते हुए लागू किया जा रहा है और इसके जरिए केवल एक मजहब के धार्मिक और चैरिटेबल संस्थानों पर दबाव डाला जा रहा है। उनका यह बयान उस समय आया जब विधेयक को लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए लाया जा रहा था। उमर अब्दुल्ला का कहना था कि इस विधेयक से ऐसा लगता है कि केवल मुस्लिम समाज के धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है, जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
उमर अब्दुल्ला का बयान
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हर मजहब का एक चैरिटेबल विंग होता है। हमारे यहां खैरात, वक्फ के जरिए काम होता है, और ऐसा लगता है कि केवल हमारे खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है। वक्फ को इस तरह निशाना बनाना अफसोस की बात है। बेहतर होता कि यह विधेयक नहीं आता। हम कभी इस बिल का समर्थन नहीं कर सकते हैं और हमारे सांसद इस बिल का विरोध करेंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बिल के खिलाफ उनकी पार्टी के सांसद लोकसभा में इसका विरोध करेंगे। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो सांसद हैं, जो इस विधेयक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करेंगे। उनका यह बयान जम्मू-कश्मीर में विशेष रूप से वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम धार्मिक संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
वक्फ संशोधन विधेयक क्या है?
वक्फ संशोधन विधेयक, जिसे बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा, वक्फ बोर्डों के संचालन और प्रशासन में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव है। यह विधेयक पहले भी पेश किया गया था, लेकिन पिछले साल इसे दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति को भेजा गया था, ताकि इस पर गहराई से विचार किया जा सके। समिति की सिफारिशों के आधार पर इस विधेयक में कुछ बदलाव किए गए थे।
विधेयक के प्रमुख उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उनकी स्वायत्तता को बढ़ावा देना है, लेकिन उमर अब्दुल्ला का आरोप है कि इस विधेयक के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और चैरिटेबल संस्थानों को अधिक नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा में हंगामे की संभावना
यह विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा, और इसके दौरान भारी हंगामे की संभावना जताई जा रही है। विपक्षी दलों ने पहले ही इस विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया है, और वे इस पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार ने विधेयक पर चर्चा के लिए कम समय आवंटित करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि अन्य विधायी कार्यों को भी निपटाया जा सके।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है और उन्हें सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा है। इसके अलावा, विपक्षी दलों ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में विधेयक पर 12 घंटे की चर्चा का समय मांगा था, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। इस पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, और विपक्षी नेताओं ने बैठक छोड़ दी।
कांग्रेस और बीजेपी का रुख
विधेयक को लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, जिसका मतलब है कि उन्हें विधेयक के पक्ष में मतदान करना अनिवार्य होगा। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां विधेयक का समर्थन करती हैं और उनका मानना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्डों के संचालन में सुधार लाने के लिए जरूरी है।
हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि इस विधेयक के जरिए एक विशेष समुदाय के धार्मिक और चैरिटेबल संस्थानों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जो कि धार्मिक भेदभाव का संकेत है। उनकी चिंता यह भी है कि इस विधेयक के माध्यम से सरकार वक्फ संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है, जिससे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक संस्थानों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता कम हो सकती है।