
नई दिल्ली – बुधवार को राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने वक्फ संशोधन बिल 2025 पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रमों पर स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल का मुख्य उद्देश्य वक्फ की संपत्ति का उचित रखरखाव और उसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। साथ ही, जेपी नड्डा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बिल के खिलाफ जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है और उसे सिरे से नकारा जाना चाहिए।
वक्फ संपत्ति के रखरखाव में पारदर्शिता लाने का उद्देश्य
जेपी नड्डा ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य वक्फ की संपत्ति के रखरखाव को पारदर्शी और सुचारू बनाना है, ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके। यह बिल इसके लिए लाया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल पर काफी चर्चा हुई है और अब यह आवश्यक है कि इसे लागू किया जाए, ताकि वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग हो सके।
जेपी नड्डा ने वक्फ संपत्ति की देखरेख में सरकार की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि, “हम संविधान से चलते हैं, जबकि कुछ लोग सिर्फ किताबें दिखाते हैं, लेकिन उनका असल में इनका इस्तेमाल नहीं करते।” उन्होंने कई मुस्लिम देशों का उदाहरण दिया, जहां वक्फ संपत्तियों का रखरखाव सरकारें करती हैं, लेकिन भारत में इसे बेहतर तरीके से लागू करने की जरूरत है, और यही इस बिल का उद्देश्य है।
वक्फ बिल 2025 की तुलना 2013 के बिल से
जेपी नड्डा ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल 2025 को 2013 में लाए गए वक्फ बिल से तुलना की और इसके अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि 2013 में वक्फ बिल के लिए केवल 13 सदस्यीय समिति बनाई गई थी, जबकि 2025 के संशोधन बिल के लिए 31 सदस्यीय समिति का गठन किया गया। उन्होंने इस तथ्य को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इस बार अधिक व्यापक और निष्पक्ष विचार-विमर्श के बाद यह बिल तैयार किया गया है।
“हमने जो संशोधन किया है, वह वक्फ संपत्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए है। हम इसे एक सशक्त और पारदर्शी तरीके से चलाना चाहते हैं,” नड्डा ने कहा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर वक्फ संपत्ति का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जाता है तो यह धार्मिक समाज के लिए एक नुकसान हो सकता है।
विपक्ष पर निशाना
जेपी नड्डा ने इस दौरान विपक्ष पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों को निशाने पर लिया और कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के साथ चलते हैं। हमें वोटबैंक की राजनीति से बाहर निकलकर देशहित की बात करने की जरूरत है।” नड्डा ने आगे कहा कि यह सवाल उठता है कि पिछले 70 वर्षों में किसने वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण रखा और जनता को इससे बाहर रखा।
नड्डा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने वक्फ के मामले को हमेशा अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया और इसका ठीक से संचालन नहीं होने दिया। “2013 में संशोधन के बाद भी आप विपक्ष में बैठे हैं, और अब हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि हम वक्फ बोर्ड पर कब्जा कर रहे हैं,” नड्डा ने कहा।
उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कि विपक्ष की राजनीति अक्सर वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमती है, और उन्होंने पूछा, “क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को यह समझ नहीं आता कि वक्फ संपत्ति का सही तरीके से रखरखाव होना चाहिए? क्या यह उनके लिए भी जरूरी नहीं है?”
वक्फ बोर्ड पर सरकार की भूमिका
जेपी नड्डा ने वक्फ बोर्ड पर सरकार की भूमिका की व्याख्या करते हुए कहा कि यह बिल वक्फ बोर्ड की गतिविधियों में सुधार के लिए लाया गया है, न कि इसके अधिकारों में किसी तरह की कमी लाने के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ वक्फ संपत्तियों का उचित प्रबंधन और पारदर्शिता लाना है, ताकि उनका सही इस्तेमाल हो सके और कोई भी गलत काम न हो।
“यह बिल वक्फ की संपत्ति को पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए है। हम इसे किसी के निजी हितों के लिए नहीं बल्कि समाज के लाभ के लिए लागू कर रहे हैं,” नड्डा ने कहा।