
पंजाब में एक बार फिर से पनबस और पीआरटीसी बसों के पहिए थमने जा रहे हैं। पनबस और पीआरटीसी के कर्मचारियों ने वीरवार (2 अप्रैल) को हड़ताल का एलान किया है। इस हड़ताल के चलते पंजाब में यात्री बसों की सेवाएं प्रभावित होने वाली हैं। कर्मचारियों ने सरकार से अपनी लंबित मांगों को लेकर सख्त कदम उठाने की अपील की है, और अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो सात, आठ और नौ अप्रैल को तीन दिन की हड़ताल का भी एलान किया गया है।
पनबस और पीआरटीसी कर्मचारियों का गुस्सा
पंजाब रोडवेज की प्रमुख सेवाएं प्रदान करने वाली पनबस और पीआरटीसी के कर्मचारी पिछले काफी समय से सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने, और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देने की बात शामिल है। सरकार के साथ कई दौर की वार्ताएं हुई हैं, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और उन्हें बार-बार आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
शमशेर सिंह, मुलाजिम संस्था के प्रतिनिधि ने बताया, “हमारी मुख्य मांगें ये हैं कि कच्चे मुलाजिमों को पक्का किया जाए, और ठेकेदारी प्रथा को खत्म किया जाए। इसके अलावा, हम यह भी चाहते हैं कि बसों की संख्या बढ़ाई जाए, क्योंकि वर्तमान में पनबस और पीआरटीसी की बेड़े में कोई नई बस नहीं जोड़ी गई है।”
पंजाब में हड़ताल का पूरा असर
सरकार और कर्मचारियों के बीच गतिरोध के कारण, वीरवार को पूरे पंजाब में दो घंटे के लिए बस सेवा बंद रहेगी। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक करीब 2500 बसों का चक्का जाम किया जाएगा। इस दौरान प्राइवेट बसें अपनी सेवाएं जारी रखेंगी, लेकिन सार्वजनिक बसों के न चलने से यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
इसके अलावा, कर्मचारियों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो 7, 8 और 9 अप्रैल को पंजाब की लगभग 2500 बसों का तीन दिन तक चक्का जाम किया जाएगा। कर्मचारियों ने यह भी घोषणा की है कि वे इस दौरान मंत्री की कोठी के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे।
पनबस और पीआरटीसी की दयनीय स्थिति
पनबस और पीआरटीसी के कर्मचारी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि विभाग की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। शमशेर सिंह ने बताया, “पिछले लंबे समय से कोई नई बसें हमारी बेड़े में शामिल नहीं की गई हैं। इसके बजाय, कई पुरानी बसों को भी कम किया गया है, जिससे यात्रा सेवाओं का संचालन कठिन हो गया है। आने वाले समय में यदि यह स्थिति रही तो पनबस और पीआरटीसी को चलाना और भी मुश्किल हो जाएगा।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन इसके उलट हरियाणा और दिल्ली के ठेकेदारों को टेंडर देकर पंजाब में बसों का संचालन सौंप दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय कर्मचारियों में असंतोष है। शमशेर सिंह का कहना था, “सरकार ने जो वादे किए थे, वो सब अधूरे हैं। हम चाहते हैं कि ठेकेदारी प्रथा खत्म हो और कर्मचारियों को स्थायी रोजगार दिया जाए, लेकिन इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।”
मुलाजिमों की मुख्य मांगें
पारदर्शिता के साथ अपनी मांगों को उजागर करते हुए शमशेर सिंह ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, ताकि उनके भविष्य को सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने नई बसों की खरीदारी की मांग भी की, ताकि सार्वजनिक परिवहन की स्थिति को सुधारा जा सके।
इसके अतिरिक्त कर्मचारियों का कहना है कि विभाग के कुछ अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं, जिससे उनकी समस्याएं हल नहीं हो पा रही हैं। “हर बार हमसे आश्वासन दिया जाता है, लेकिन हम देखते हैं कि कोई बदलाव नहीं होता। इस स्थिति से न सिर्फ कर्मचारियों को, बल्कि यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।”