भारत की राजनीति एक बार फिर संविधान संशोधन के इर्द-गिर्द गरमा गई है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की दो प्रमुख राजनीतिक धाराओं — सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी गठबंधन INDIA — के बीच गहरी खाई बनती नजर आ रही है। इस बहुचर्चित विधेयक को अब संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया है, जहां इसके सभी प्रावधानों पर गहन समीक्षा की जाएगी।
शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस विधेयक को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे एकतरफा, दमनात्मक और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया।
क्या है 130वां संविधान संशोधन विधेयक?
130वें संविधान संशोधन विधेयक को हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया था। इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य है: “प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अगर किसी आपराधिक मामले में लगातार 30 दिन तक जेल में रखा जाता है, तो उन्हें 31वें दिन स्वेच्छा से इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उन्हें पद से हटाया जा सकता है।”
सरकार का दावा है कि यह संशोधन सत्ता के दुरुपयोग को रोकने, जवाबदेही तय करने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए लाया गया है। लेकिन विपक्ष इसे एक राजनीतिक हथियार बता रहा है।
खरगे का तीखा हमला: “डराने की राजनीति हो रही है”
प्रेस से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा “यह विधेयक डराने के लिए लाया गया है। विपक्षी नेताओं को ED, CBI और IT के मामलों में घसीटकर कमजोर करने की साजिश है।”
उन्होंने पूछा, “अगर 75 वर्षों से IPC और CPC जैसे कानून पर्याप्त थे, तो अब यह नया नियम लाने की क्या जरूरत थी?” खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के विधेयकों का प्रयोग आने वाले समय में उपराष्ट्रपति चुनाव जैसे संवैधानिक अवसरों को प्रभावित करने के लिए किया जाएगा।
विपक्ष की चिंता: “दुरुपयोग के रास्ते खुलेंगे”
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), शिवसेना (UBT) सहित कई विपक्षी दलों ने विधेयक की संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इस विधेयक के जरिए राजनीतिक बदले की कार्रवाई को वैधता दी जा रही है। किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री को मिथ्या या दुर्भावनापूर्ण मुकदमे में फंसाकर पद से हटाना आसान हो जाएगा। सरकार की जांच एजेंसियों पर पहले से ही पक्षपात के आरोप हैं, ऐसे में यह विधेयक लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है।
JPC को भेजा गया विधेयक: अगला कदम क्या?
गंभीर विरोध और बहस के बाद सरकार ने फिलहाल यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया है। यह समिति विधेयक के हर प्रावधान पर विस्तार से चर्चा करेगी, विशेषज्ञों की राय लेगी और जरूरी सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JPC की प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं, लेकिन अगर सरकार संख्या बल के आधार पर इसे पारित करवा लेती है तो यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।