पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “ये लोग पंजाब की जवानी खा गए।” मुख्यमंत्री मोहाली में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसमें वन विभाग के 942 कर्मचारियों को नियमित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हाउसिंग व शहरी विकास विभाग के 6 कर्मचारियों को भी पक्का करने की घोषणा की। इस मौके पर मान ने न केवल कर्मचारियों के हितों की बात की, बल्कि राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “पिछली सरकारों ने जनता की भलाई की ओर कभी ध्यान नहीं दिया। उनकी प्राथमिकता सिर्फ सत्ता और पैसा थी।”
मजीठिया और विपक्ष पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री ने बिक्रम मजीठिया का नाम लेते हुए कहा कि “हमने जब इन पर कार्रवाई की तो साफ हो गया कि ये सब आपस में मिले हुए हैं। पहले तो विपक्षी कहते थे कि सरकार बड़े तस्करों को नहीं पकड़ती, अब जब हमने पकड़ लिया, तो विरोध करने लगे।” उन्होंने कहा कि अब जनता खुद इन नेताओं की जमानतें जब्त करवा रही है, और ये लोग बिना मतलब के मुझे कोसते रहते हैं।
मान ने यह भी कहा कि “जिन्होंने इस कुर्सी के साथ कभी इंसाफ नहीं किया, उन्हें जनता ने नकार दिया और हमें चुन लिया। मैंने तो इस कुर्सी के लिए कभी लालच नहीं किया था, लेकिन लोगों को सच्चाई चाहिए थी, इसीलिए उन्होंने हमें मौका दिया।”
“राजा ही व्यापारी बन जाए तो जनता का भला नहीं हो सकता”
अपने भाषण में मान ने पूर्ववर्ती सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “जिस देश का राजा ही व्यापार करने लग जाए, वहां जनता का भला कभी नहीं हो सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के नेताओं ने अपनी प्राथमिकताएं बदल दी थीं। “वे जनता की बजाय अपने परिवारों के हितों को साधने में जुटे थे, बड़ी-बड़ी कंपनियां खड़ी की गईं, लेकिन सरकारी कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला।”
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 10 से 20 साल तक कर्मचारी दैनिक वेतन पर या अनुबंध पर काम करते रहे, लेकिन किसी सरकार ने उन्हें स्थायी नहीं किया।
नियमित किए गए 942 कर्मचारी: “अब उन्हें कल की चिंता नहीं करनी पड़ेगी”
मान ने घोषणा की कि वन विभाग के 942 कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया है, जिनके भविष्य को लेकर अब तक कोई निश्चितता नहीं थी। “ये लोग कल भी अनिश्चितता में जी रहे थे कि पता नहीं नौकरी रहेगी या नहीं। अब उन्हें स्थायित्व मिलेगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हर कर्मचारी का केस व्यक्तिगत रूप से जांचा, अदालतों में भी उनका पक्ष मजबूती से रखा गया। “यह प्रक्रिया बहुत पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन पिछली सरकारों की असफलता के चलते देरी हुई,” मान ने स्पष्ट किया।
पर्यावरण की चिंता और वन विभाग की भूमिका
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, “आज पूरे देश में जलवायु परिवर्तन हो रहा है क्योंकि प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ की गई है। ऐसे में पर्यावरण और वन विभाग के कर्मचारियों का महत्व और भी बढ़ गया है।”
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि “हम पेड़ तो लगा देते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं करते। इसलिए न तो उनके अस्तित्व का कुछ अता-पता रहता है, न ही उनका कोई लाभ होता है।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार अब वन विभाग के गेस्ट हाउसों को सुधारने की योजना पर काम कर रही है, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
“सबसे ज्यादा लुटेरे पंजाब को मिले हैं”
मुख्यमंत्री मान ने तल्ख लहजे में कहा कि “परमात्मा ने पंजाब को सबसे ज्यादा लुटेरे दे दिए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कुछ नेता जेल यात्रा कर चुके हैं और कुछ अभी भी वहां हैं। “सबसे पहले नाभा के एक मंत्री ने जेल यात्रा की, और अभी भी एक नाभा में बैठा है,” मान ने तंज कसते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के वित्त मंत्री नौ साल तक यह कहते रहे कि खजाना खाली है, तो युवाओं ने पलायन करना शुरू कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही सरकार का काम है—जनता को विकल्पहीन छोड़ देना?
सीएम हाउस के पास से हटाए नाके
अपने सादगीपूर्ण और जनता से जुड़ाव की छवि को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि “हमारे ढाई साल पूरे हो गए हैं, और हमने मुख्यमंत्री आवास के पास से नाके हटा दिए हैं, क्योंकि उनकी कोई जरूरत नहीं थी।” उन्होंने कहा कि सत्ता का मतलब है जनता की सेवा, न कि घेराबंदी और दिखावा