मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगे फ्लीट के एक वाहन में हाल ही में तकनीकी खराबी सामने आई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया। यह वाहन मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल था और नियमित ड्यूटी के दौरान उसमें तकनीकी समस्या पाई गई। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि वाहन की तकनीकी जांच तय मानकों के अनुसार नहीं की गई थी। मामला सीधे मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण पुलिस मुख्यालय ने इसे अत्यंत गंभीर चूक माना।घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। शुरुआती स्तर पर यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित कर्मचारी द्वारा लापरवाही बरती गई, जिससे वाहन समय रहते तकनीकी रूप से फिट घोषित नहीं किया जा सका। इस तरह की चूक किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं मानी गई, क्योंकि सुरक्षा फ्लीट के वाहनों की विश्वसनीयता पर ही वीआईपी सुरक्षा निर्भर करती है।
ADG (इंटेलिजेंस एवं सुरक्षा) अभिनव कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही SP (सुरक्षा) को पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्हें निर्देशित किया गया है कि 7 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करें कि लापरवाही किन स्तरों पर हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री एवं राजभवन की सुरक्षा में लगे सभी वाहनों का व्यापक तकनीकी परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जो वाहन तय सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें तुरंत फ्लीट से हटाया जाएगा। उनकी जगह नए या मानक अनुरूप वाहनों को शामिल किया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित तकनीकी ऑडिट, सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करने जैसे पुख्ता इंतजाम लागू किए जा रहे हैं।